परिचय (Introduction)
थायरॉइड एक छोटी सी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण ग्रंथि है, जो हमारे शरीर की ऊर्जा, मेटाबॉलिज़्म, हार्मोनल बैलेंस और मानसिक स्थिति को नियंत्रित करती है।
यह ग्रंथि गले के सामने तितली के आकार में स्थित होती है और दो मुख्य हार्मोन — T3 (ट्रायआयोडोथायरोनिन) और T4 (थायरॉक्सिन) — बनाती है।
इन हार्मोनों का काम होता है शरीर में हर सेल तक ऊर्जा पहुँचाना और सभी अंगों के कार्यों को सामान्य रखना।
लेकिन जब यह ग्रंथि ज़्यादा या कम मात्रा में हार्मोन बनाने लगती है, तो शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है।
यही स्थिति “थायरॉइड डिसऑर्डर” कहलाती है। आज भारत में लगभग हर दस में से तीन व्यक्ति किसी न किसी रूप में थायरॉइड की समस्या से जूझ रहे हैं — और खासकर महिलाएँ इससे ज़्यादा प्रभावित होती हैं।
थायरॉइड के प्रकार (Types of Thyroid Disorders)
थायरॉइड दो मुख्य प्रकार के होते हैं —
1️⃣ हाइपोथायरॉइडिज़्म (Hypothyroidism)
इस स्थिति में थायरॉइड ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में हार्मोन नहीं बनाती।
इससे शरीर का मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है और व्यक्ति सुस्त, थका हुआ और वजन बढ़ने जैसी समस्याओं से जूझता है।
यह स्थिति ज्यादातर महिलाओं और 40 वर्ष से ऊपर की आयु में अधिक देखी जाती है।
मुख्य कारण:
- ऑटोइम्यून बीमारी (Hashimoto’s Thyroiditis)
- आयोडीन की कमी
- मानसिक तनाव
- हार्मोनल असंतुलन
- गर्भावस्था के बाद हार्मोन में बदलाव
2️⃣ हाइपरथायरॉइडिज़्म (Hyperthyroidism)
यह स्थिति तब होती है जब थायरॉइड ग्रंथि ज़रूरत से ज़्यादा हार्मोन बनाती है।
इससे मेटाबॉलिज़्म बहुत तेज़ हो जाता है, व्यक्ति को बेचैनी, वजन घटने और नींद न आने जैसी दिक्कतें होती हैं।
मुख्य कारण:
- Graves’ Disease (एक ऑटोइम्यून बीमारी)
- थायरॉइड नोड्यूल्स
- अधिक आयोडीन का सेवन
- कुछ दवाइयों का असर
थायरॉइड के सामान्य लक्षण (Common Symptoms of Thyroid)
🧊 Hypothyroidism के लक्षण:
- वजन बढ़ना
- बाल झड़ना और रूखापन
- थकान और सुस्ती
- त्वचा सूखना
- ठंड ज़्यादा लगना
- मूड स्विंग और अवसाद
- कब्ज़ की समस्या
- मासिक धर्म में अनियमितता
🔥 Hyperthyroidism के लक्षण:
- वजन घटना
- दिल की धड़कन तेज़ होना
- नींद न आना
- भूख ज़्यादा लगना
- हाथ कांपना
- घबराहट और चिड़चिड़ापन
- पसीना ज़्यादा आना
थायरॉइड के प्रमुख कारण (Causes of Thyroid Problems)
आयोडीन की कमी या अधिकता – शरीर को सही मात्रा में आयोडीन की आवश्यकता होती है।
तनाव और चिंता (Stress & Anxiety) – मानसिक तनाव थायरॉइड हार्मोन को असंतुलित कर सकता है।
आनुवांशिकता (Genetic Factor) – अगर परिवार में किसी को है, तो संभावना अधिक रहती है।
हार्मोनल बदलाव (Hormonal Changes) – खासकर महिलाओं में गर्भावस्था या रजोनिवृत्ति के दौरान।
गलत खानपान और जीवनशैली (Unhealthy Lifestyle) – फास्ट फूड, नींद की कमी, और शारीरिक निष्क्रियता।
ऑटोइम्यून डिसऑर्डर (Autoimmune Diseases) – जब शरीर की इम्यून प्रणाली स्वयं थायरॉइड पर हमला करने लगती है।
थायरॉइड की जांच (Thyroid Test and Diagnosis)
थायरॉइड की पुष्टि के लिए डॉक्टर कुछ विशेष रक्त परीक्षण करवाते हैं:
- TSH (Thyroid Stimulating Hormone)
- T3 (Triiodothyronine)
- T4 (Thyroxine)
अगर TSH का स्तर बढ़ा हुआ है और T3, T4 कम हैं → Hypothyroidism
अगर TSH कम है और T3, T4 ज़्यादा हैं → Hyperthyroidism
साथ ही, डॉक्टर अल्ट्रासाउंड या थायरॉइड स्कैन भी करा सकते हैं यदि ग्रंथि में सूजन या गांठ हो।
थायरॉइड का आधुनिक उपचार (Modern / Allopathic Treatment)
- Hypothyroidism में:
- मरीज को लेवोथायरॉक्सिन (Levothyroxine) नाम की दवा दी जाती है, जो कृत्रिम T4 हार्मोन है।
- इसे रोज़ खाली पेट लेना होता है, और डोज डॉक्टर द्वारा तय की जाती है।
- Hyperthyroidism में:
- डॉक्टर एंटी-थायरॉइड दवाइयाँ जैसे Methimazole या Propylthiouracil देते हैं।
- कुछ मामलों में Radioactive Iodine Therapy या सर्जरी (Thyroidectomy) की ज़रूरत पड़ती है।
👉 इन दवाओं को बिना डॉक्टर की सलाह के कभी शुरू या बंद न करें, क्योंकि हार्मोनल संतुलन बिगड़ सकता है।
थायरॉइड का आयुर्वेदिक इलाज (Ayurvedic Treatment for Thyroid)
आयुर्वेद के अनुसार थायरॉइड विकार “कफ दोष” और “अग्नि मंद्य” (पाचन शक्ति की कमजोरी) के कारण होता है।
थायरॉइड का मूल उपचार शरीर के दोषों को संतुलित करने और मेटाबॉलिज़्म को सामान्य करने पर केंद्रित होता है।
🔸 प्रमुख आयुर्वेदिक औषधियाँ:
- कांचनार गुग्गुलु (Kanchanar Guggulu) – ग्रंथि की सूजन कम करता है और थायरॉइड संतुलन में मदद करता है।
- अश्वगंधा (Ashwagandha) – तनाव कम कर हार्मोन को नियंत्रित करता है।
- त्रिफला चूर्ण (Triphala) – पाचन और डिटॉक्स में सहायक।
- गिलोय (Giloy) – इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है।
- शंखपुष्पी और ब्राह्मी – मानसिक संतुलन और नींद के लिए उपयोगी।
🔸 आयुर्वेदिक उपचार पद्धतियाँ:
- अभ्यंग (तेल मालिश) – शरीर के दोषों को संतुलित करती है।
- वमन और विरेचन पंचकर्म – शरीर से विषैले तत्व निकालते हैं।
- योग और ध्यान – मानसिक शांति और हार्मोनल बैलेंस के लिए आवश्यक।
योग और प्राणायाम से थायरॉइड नियंत्रण (Yoga for Thyroid Control)
थायरॉइड रोगियों के लिए योग सबसे प्राकृतिक उपचारों में से एक है।
नियमित अभ्यास से ग्रंथि की क्रियाशीलता बेहतर होती है।
प्रभावी आसन:
- सर्वांगासन (Shoulder Stand)
- मत्स्यासन (Fish Pose)
- भुजंगासन (Cobra Pose)
- उज्जायी प्राणायाम
- अनुलोम-विलोम
- कपालभाति
इनका रोज़ाना अभ्यास सुबह खाली पेट करने से शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है और हार्मोन संतुलित रहते हैं।
थायरॉइड के मरीजों के लिए आहार (Diet for Thyroid Patients)
🍏 क्या खाएँ:
- ताजे फल जैसे सेब, अमरूद, पपीता, नारियल पानी
- साबुत अनाज और मूंग दाल
- हरी पत्तेदार सब्जियाँ
- ग्रीन टी, हर्बल चाय
- घी और तिल का तेल सीमित मात्रा में
🚫 क्या न खाएँ:
- जंक फूड, तला हुआ भोजन
- सोया प्रोटीन का अधिक सेवन
- फूलगोभी, ब्रोकली, पत्तागोभी (Goitrogenic food)
- ज्यादा नमक, चीनी और कोल्ड ड्रिंक्स
- कैफीन और शराब
💧 अन्य सुझाव:
- पर्याप्त पानी पिएँ (8–10 गिलास रोज़)
- आयोडीन युक्त नमक का संतुलित उपयोग करें
- खाना धीरे-धीरे चबाकर खाएँ
घरेलू उपाय (Home Remedies for Thyroid)
धनिया पानी:
एक चम्मच धनिया के बीज को रातभर पानी में भिगोकर सुबह उबालें और छानकर पिएँ।
→ थायरॉइड हार्मोन को नियंत्रित करता है।
तुलसी पत्ते:
प्रतिदिन खाली पेट 4–5 तुलसी के पत्ते चबाएँ।
गिलोय रस या क्वाथ:
रोज़ सुबह खाली पेट एक कप गिलोय रस पिएँ।
अश्वगंधा पाउडर:
रात को गुनगुने दूध में आधा चम्मच अश्वगंधा मिलाकर लें।
थायरॉइड के साथ जीवन (Living with Thyroid)
थायरॉइड का मतलब यह नहीं कि जीवन रुक गया — यह एक मैनेजेबल कंडीशन है।
थोड़ा अनुशासन, सही आहार, योग, और नियमित जांच से इसे पूरी तरह नियंत्रण में रखा जा सकता है।
- अपनी दवाइयाँ समय पर लें
- डॉक्टर से नियमित फॉलो-अप करें
- तनाव को कम करें
- नींद 7-8 घंटे पूरी लें
- खुद को सकारात्मक रखें
निष्कर्ष (Conclusion)
थायरॉइड आज की जीवनशैली की एक आम लेकिन गंभीर समस्या है।
यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर की लगभग हर प्रक्रिया को प्रभावित करती है, लेकिन सही समय पर पहचान और उपचार से इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।
आयुर्वेदिक औषधियाँ, संतुलित आहार, नियमित योग, और तनावमुक्त जीवनशैली अपनाकर आप थायरॉइड को प्राकृतिक रूप से संतुलित रख सकते हैं।
याद रखें — “थायरॉइड का इलाज सिर्फ दवा नहीं, बल्कि संतुलित जीवनशैली है।”






